आयुर्वेद की जानकारी

आयुर्वेद भारत का प्राचीन शास्त्र है | आयुर्वेद जीवन विज्ञानं हैं | आयुर्वेद मैं निरोगी होकर जीवन व्यतीत करना ही धर्म माना गया हैं | रोगी होकर लम्बी आयु प्राप्त करना या निरोगी होकर कम आयु प्राप्य करना दोनों ही आयुर्वेद मैं मान्य नहीं है | निरोगी जीवन के न धन की प्राप्ति हो सकती है, न सुख की प्राप्ति हो सकती है और न ही दरम की प्राप्ति हो सकती है | सस्थ्य शरीर ही जीवन को आनंद देता है | दुनिया मैं आयुर्वेद ही एक मात्र चिकित्सा पद्धति हैं जो मनुष्य को निरोगी जीवन देनेकी गारेंटी देता है बाकि अन्य सभी चिकित्सा पद्धतियों मे पहले बीमार बने फिर आपका इलाज किया जायेगा लेकिन इसके बाद भी गारेंटी कुछ भी नहीं है| महँ ऋषि वग्गभट्ट जिन्होंने आयुर्वेद के नयन को लोगों तक पोहचाया और 'अष्टांग हृदयम' नमक एक शास्त्र की रचना की | अष्टांग हृदयम मे लगभग ७००० श्लोक दिए गए हैं | राजीव भाई ने उनमेंसे कुछ प्रमुख सूत्रों को सरल भाषा मैं समझाया हैं | शरीर से भी स्वस्थ , मन से भी स्वस्थ और चित्त से भी स्वस्थ |निरोगी होना है तो वात, पित्त और कप को कप को संतुलित रखो | तीन तरह के दुःख हैं १) दैहिक दुःख २) दैविक दुःख ३) भौतिक दुःख | १० प्रतिशत दुःख पेट से हैं ,बाकी १० प्रतिशत दुःख बाहर से हैं १४८ बिमारीयाँ हैं, १० प्रतिशत आप स्वयं ठीक कर सकते हैं |शरीर को जान लीजिये और भोजन को पहचान लीजिये तो बाकी १० प्रतिशत इलाज भी आप अपना स्वयं कर सकते हैं भारत मैं प्रत्येक पौधे व वृक्ष मैं औषधीय गुण हैं क्योकी सूर्य का प्रकाश मिलता हैं | दुनिया का सबसे बडा औषधि केंद्र आपके घर में आपका रसोईघर हैं | १०० औषधिया आपके रसोईघर मैं हैं आप स्वयं इलाज कर सकते हैं |और स्वस्थ एवं लम्बा निरोगी जीवन जी सकते हैं | हम कुछ आवश्यक (महत्वपूर्ण) सूत्र आपको नियमित रूप से देते रहेंगे | अगर इन सूत्रो का पालन आप अपने जीवन मैं करेंगे तो आप जीवन भर निरोगी स्वस्थ रहेंगे और रोग आपसे दूर रहेंगे |विदेशीय कम्पनिया द्ववो नाम पर धन लुटकर जो जहर हमें बाट ती हैं ऊस पर रोख लगेगी एवं देश का धन देश मैं रहेगा |

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