पाणी धरती पर अमृत है |

तीसरा सूत्र:-पाणी धरती पर अमृत है |

पाणी जब भी पिये घुट -घुट करके पिये |
पेट मे अम्ल बनता तथा मुख मे बनने वाली लार क्षारीय प्रकुती की होती है जब हमपानी हम घुट -घुट कर पीते है तो यह लार पानी के साथ मिलकर पेट मे पहुचती है एवं पेट मे पहुचकर यह पेट के आम्ल को अणावेशीत (न्यूट्रलाइज) कर देती है | पाणी का अपना कोई गुण नहीं होता है पानी को जिसमे मिला दे पानी उसी का गुण धारण कर लेता है | घूट-घूट पानी पिने से लार साथ मे पेट मे जाती है और यही भोजन को पचाने मे भी अहम भूमिका निभाती है |

यह लार बहुमूल्य है इसे बर्बाद मत करिये | गलत तारिके से इस्तेमाल करणे से अमृत भी विष बन जात है |

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