संतृष्टी
नवाँ सूत्र:-पेट कि संतृष्टी से मन कि संतृष्टी जःयादा बडी है |
भोजन हमेशा जमीन पर बैठ करें |
जो व्क्ती अधिक श्रम करते हैं वे उकडू बैठकर भोजन करें अथवा पालथी मारकर सुखासन मे भोजन करना चाहिये |
जब आप सुखासन मे बैठते हैं टब शरीर मे लगणे वाले गुरुत्वाकर्षण बल का केन्द्र नाभी पर होता हैं क्योकी नाभी हमारे शरीर का केन्द्र बिन्दु हैं और नाभी के पास ही जठर होता हैं, और इस कारण पाचक रस अच्छा बनेगा |
पाचक रस अच्छा बनेगा तो रस, रक्त मांस, मेद,अस्थि, मज्जा, वीर्य सब अच्छा बनेगा |
भोजन का स्थान बैठने के स्थान से सदैव उच्चा होना चाहिये |
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