गोमुत्र

जिस घर, मे गाय बंधी रहती है, उस घर मे किसी चीज कि कमी नहीं रहती है |
गोमूत्र से इलाज:- गोमूत्र मे १८ पोषक तत्व हैं इसमे वात,पित्त और कप तिनो खत्म करणे की अदभुत शक्ती हैं, शरीर के रोगो को ठीक करणे के लिये जो गुण चाहिये सबी गुण गोमूत्र मे हैं |
कॅन्सर की दवा:- कच्ची हल्दी को चटणी बना लें, कपडे मे रखकर उसका रस निकाल लें २-३ चमच रस शहद या देशी गुड के साथ सुबह खाली पेट ले १ घंटे बाद देशी गाय का मूत्र आधा कप पिये |
आँखो का उपचार:- रेटिनल ढिचमेंट, भेंगापण, मोतियाबिंद, केटरेक्ट, जिनकी आंखे लाल रहेती हैं रेटिना की कोई भी तकालीप हो आँखो मे पानी आता हैं, खुजली आता हैं, गोमूत्र से ठीक हो जाते हैं |
संधिवात:- कमर दुखन्ना कंधा दुखन्ना घुटणो का दर्द- जोडो का दर्द, किसी भी प्रकार का दर्द,दो चमच मेथी के दाने दो गिलास पाणी मे रॅट को ढालकर सुबह - सुबह बासी मुह घुट मार-मार कर पिय और मेथी दाना चंबा - चबाकर खाय इसके ४० मिनिट बाद देशी गाय का मूत्र आधा कप पिये |
हेपेटाईटिस (Jaundice):- A, B ,C, D, E, F बडी आसानी से गोमूत्र से ठीक हो जाता है |
  • कान मे मवाद आता है, कम सुनाई देता है दो बूंद गोमूत्र के डाल लें ३ दिन मे ठीक हो जायेगा और कान के कई रोग गोमूत्र से ठीक हो जाते है |
  • त्वचा रोग, खाज -खुजली,दाद,सोरायसिस ,एकगजिमा मे गोमूत्रादी मालिश करने से ठीक हो जायेग |
  • २०-२५ वर्ष पुरानी खासी है रिज सुबह आधा कप गोमूत्र का सेवन करें खासी ठीक हो जाती है |
कब्जीयत से होणे वाली बिमारी कोष्ठबद्धता, मूल व्याधी, भगंदर, बवासीर, अग्नी मंदता,अस्थमा,टी. बी. मे रोज सुबह आधा कप गोमूत्र का सेवन ९० दिन तक करें |
घाव नहीं भरता है - गेंदे के फूल मे गोमूत्र मिलाकर उसकी चटणी बनाकर घाव पर लेप लगा दे गैग्रीन मे नई कोशिये बनती हैं |
पाव कप गोमूत्र के साथ लेने से २० गुना तेजी से टी . बी ठीक होता हैं |
पेट मे कीडे हो तो एक चमच गोमूत्र ८-१० दिन पिये कीडे नहीं पडेंगे |
सर मे खुजली, डेंड्रप है गोमूत्र पानी मे घोलकर सिर कि मालिश करें |
मूत्र पिण्ड के रोग वाले रोगी आधा कप लें, किडनी फेलियर मे गोमूत्र बहुत उपयोगी है |
बाहरी खाज खुजली के लिये गोबर मे गोमूत्र मिलाकर लेप लगाकर 10- १५ मिनिट धूप मे बैठे |
गर्भवती गाय का मूत्र कभी ना लें गौमुत्र हमेशा कांच कि बोतल मे राखण चाहिये और ज्यादा पुराना हो तो पानी मिलाकार पिना चाहिये, ताजा गोमूत्र पिना सर्वउत्तम है |गोमूत्र अर्क एक चमच से ज्यादा ना लें अत्याधिक रोगी व्यक्ति पाव कप गोमूत्र दो बार लें, निरोगी व्यक्ती पाव कप गोमूत्र एक बार लें |
पित्त के रोगी - गॅस, पेट मे घाव पाणी मिलाकार १/४ गोमूत्र दो बार लें | कप वात वाले सर्दी खासी के रोगी गोमूत्र सीधे उपयोग करें | बडो के लिये आधा कप, छोटे बछो के लिये पाव कप गोमूत्र लें |

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