भोजन के अंत मे पाणी पिना विष के समान है |

दूसरा सूत्र:-अपने शरीर के ८५ प्रतिशत रोग आप स्वयं ठी कर सकते है |

भोजन के अंत मे पाणी पिना विष के समान है |

भोजन को पच्चने के लिए जठर मे अग्नी प्रदीप्त होती है इसे जठराग्नि कहते है और भोजन के अंत मे पाणी पिने से जठराग्नि शांत हो जाती है जिससे आपका भोजन पचता नहीं सडता है | इससे वायु (गॅस) बनेगी पेट मे जलनं , छाती मे जलनं गले मे जलनं , पीठ या कमर मे दर्द , सर मे दर्द आना , ऍसिडिटी , हायपर ऍसिडिटी , अल्सर , बवासीर , मूल व्याधि , भगंदर ,कोलेस्ट्रॉल बढेंगा, हार्ड अटायक आयेगा, अंत मे कॅन्सर होगा और इस एक गल्ती से शरीर मे १०३ प्रकार के रोग पैदा होते है |

पानी कब पीना चाहिये ?
भोजन करणे के कम से कम ४८ मिनिट पहले पानी पिये और भोजन और भोजन करने के डेढ से दो घंटे बाद पानी पिना चाहिये, भोजन के अंत मे एक - दो घूट पानी गला साप करने के लिये पी सकते है | दो अनाज जैसे रोटी और चावल खा रहे है तो उसके बीच मे एक या दो घूट पानी पी सकते है |पानी जाब भी पिये घूट - घूट भरकर पिये जिससे पानी के साथ मूह कि लार भी पेट मे जाती है जो कि पेट मे बनने वाले अम्ल को शांत करणे मे सहायक होती है | सुबह के भोजन के पश्चात फलो का रस, दोपहर के पश्चात तक्रम( छ्याच) और शाम के भोजन के पश्चात रात्री मे गर्म दूध ले सकते है |
(सुबह टमाटर और गणे का रस भी तर सकते हो |

जीवन अनमोल है और छोटी - सी लापरवाही कही रोग ला सक्ती है |

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