जलवायु
दुनिया में १६ प्रकार के जलवायु है और भारत मे सभी जलवायु हैं |
९० प्रतिशद रोग पेट से है बाकि १० प्रतिशद रोग बहार से है | १४८ प्रकार के रोग है जिसमे से ९० प्रतिशद आप स्वयं ठीक कर सकते है | दुनिया का सबसे बड़ा औषदि केंद्र आपका रसोईघर है |
सुबह कफ अधिक रहता है दोपहर मे पित्त अधिक रहता है और शाम को वात अधिक होता है |
- शुद्ध तेल वात और जिन चीजों में पानी की मात्रा अधिक हो वह वात नाशक है |
- दूध, दही, छाछ, फलों का रस सभी तरह के वात नाशक है |
- अजवाइन काला नमक के साथ तीन दिन लेने पर कैसे भी वायु ख़त्म हो जाएगी |
- गर्मी में पित्त भड़कता है, देशी गाय का घी ऊपर की श्रेणी में आता है जो पित्त को जिंदगीभर शांत रखता है, घी के बाद अजवाइन सबसे अधिक पित्त का नाश करती है | काला जीरा, हींग, सूखा या हरा धनिया, सोंठ \"अदरक के सूखने के बाद सोंठ बनती है\" लेकिन सोंठ के गुण अदरक से १०० गुना बढ़ जाते है |
- कफ को दूर करने की सबसे अछि औषधि है तिल, गुड़, शहद, गहरे रंग का देशी पान, सोंफ, लौंग ऐसी १०० वस्तुए है जो कफ का शमन करती है |
सदैव वात, पित्त और कफ बराबर मात्रा में रहना चाहिए | १ से १४ तक कफ प्रभाव अधिक होते है, १४ से ६० वर्ष तक पित्त का प्रभाव अधिक होता है और ६० से १०० वर्ष तक शरीर वायु के प्रभाव मे अधिक रहता है |
शरीर के अनुसार दिन-चर्या
१ से ४ वर्ष तक के बच्चे को १६ घंटे की नींद चाहिए १८ घंटे की भी ले सकता है, ४ से ८ वर्ष एक के बच्चे को १२-१४ घंटे की नींद चाहिए, ८ से १४ वर्ष का बच्चा ८-९ घंटे की नींद ले सकता है और चाहे तो २ हिस्से मे ले सकता है नींद पूरी नहीं होगी तो वह चिड़चिड़ा होगा और आपकी बात नहीं मानेगा |
१ से १४ वर्ष की आयु तक कफ प्रधान होता है और कफ को शांत करने के लिए नींद पूरी लेना अति आवश्यक है इसके साथ-साथ बच्चो के सिर की मालिश अधिक करें, कान और आँख की भी करें, ना व्यायाम करें और ना ही योग करें | जिस क्षेत्र में रहे वहाँ मिलने वाले तेल का ही प्रयोग करें जैसे चेन्नई में नारियल का तेल, राजस्थान मे तिल के तेल का, बिहार मे सरसो का तेल | आँख के अंदर गाय का शुद्ध घी डालना चाहिए | दूध, मक्खन , घी , तेल , गुड़ खाना चाहिए मोटा आटा खाए , मैदे का सेवन कभी नहीं करें |
१४ से ६० वर्ष तक पित्त अधिक होता है इस आयु में ८ घंटे की नींद ले ६ घंटे से काम नींद ना ले | ४ बजे ब्रह्म मुहर्त मे उठना चाहिए इस समय वायु एकदम शुद्ध होती है |
बुढ़ापा, अस्थमा, अर्थराइटिस, डायबिटीज़ और मोटापा से बचना है तो भोजन के उपरांत काला तिल और मूंगफली चबा-चबाकर अवश्य खाये सर्दियों के समय त्योहारों मे बनने और खाने वाले पकवान तिल, मूंगफली , उड़द,गुड़, घी, चना आदि अछि तरह खाओ इससे पित्त शांत होता है | ये सभी भारी है गुरुत्व वाले पदार्थ है तिल की चिक्की खाये, अम्ल काम होते जायेगा कफ जिंदगी भर नहीं होगा | नवम्बर से फरवरी तक तिल-मूंगफली गुड़ के साथ खाये |
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