उपचार
पथारी:- पाषाण भेद (पत्थर तोड दवा) का काढा १५ - २० दिन पिये, पथारी जिसको है वो चुना कभी ना खाये|
होमियोपैथी में - बर्बेरीस - वलगेरीस (मदर टिचर) दवा कि 10-१५ बुंद एक कप पाणी में डालकर दिन में ३-४ बार पी लें डेढ से डॉ महिने में पथारी निकल जायेगी | बाद में चायना -१००० (चायना १०००) लिक्विड फार्म में दो- दो बुंद सुबह,दोपहर, शाम एक बार लेन भविष्य में कभी पथारी नहीं होगी | पथारी वाले चुने का पानी भी नहीं लें सकते है|
अर्थराईटिस:- चुना और मेथी खाईये २०- ३० साल पुराना अर्थराईटस है, हरसिंगार का पौधा जिसे रातराणी भी कहते है संस्कृत मी पारिजात कहते हैं फूल रात में खिलते हैं सुगंध बहुत आती हैं फूल सफेद और दण्डी नारंगी होती हैं, पत्ते कांटे जैसे चुंभते हैं, 6-७ पत्ते पिसकर एक गिलास पाणी में आधा रहाणे तक खूब गर्म करना, रात को हि बनाकर रह ले सुबह - सुबह खाली पेट घुट मारकर पी लें १०-१२ दिन में आराम हो जायेगा,एक से डेढ महिने में ठीक हो जायेगा कभी -कभी 3 महिने भी लग जाते हैं दोबारा गर्म नहीं कारणा हमेशा ताजा ही बनाना|
पुराना जोड़ों का दर्द, घुटने-हिप जॉइन्ड निकलने की नौबत आये तो आप रिप्लेस मत कराये इस औषधि का प्रयोग करे|
सर्दी खासी ,जुकाम:- अदरक,सोंठ, हल्दी, चुना,किशमिश, दालचीनी, मेथीदाना, काली मिर्च, तुलसी का पत्ता, अनार गुड शहद काई औषधिया हमारे रसोई घर में हैं |
१) अदरक के रस को हल्का गर्म करके उसमे शहद मिलाकार सुबह, दोहपर, शाम पिये |
२) अदरक के रस और तुलसी को पिसकर हल्का गर्म करके उसमे शहद मिलाकार सुबह,दोपहर , शाम पिये | शहद को कभी गर्म ना करे, शहद को कभी किसी में मिलाकार भी गर्म नहीं करे, शहद के बदले देशी गुड चलेगा, गुड डाळकर गर्म कर सकते हैं |
३) कच्ची हल्दी और भी अच्छी है हल्दी को हमेशा दूध में गर्म करके हि लेन चाहिये ज्यादा प्रभाव करती है पाणी के साथ भी ले सकते हैं, हल्दी कि मात्रा हमेशा पाव चमच हि लें |
बच्चो की टॉन्सिल:- बहुत पुराना रोग है आधा चमच हल्दी का प्रयोग करना, जितना मूह खुले खोलकर चमच मूह के अंदर तर्क ले जाकार हल्दी गले में डाल देना फिर एक घंटे तक उसे कुछ मत देना है, लार के द्वारा हि हल्दी पेट में जाने दे | तीन दिन लिया तो टॉन्सिलाइटिस ठीक हो जायेगा |
थ्रॉट इन्फेक्शन - पाव चमच हल्दी,एक गिलास दूध,एक चमच गाय का घी खूब गर्म करके चुस्की लेकर पिये |
जुकाम : जुकाम में गेहू जितने बडे चुने का इस्तेमाल करें |
एलर्जी : बार -बार छिक आती है देशी गे का घी रॅट को एक बुंद नाक में डालकर सो जाये |
१. जिसे नींद नहीं आती असे अच्छी नींद आयेगी | २. खराटे बंद हो जायेंगे | ३. सायनस ठीक हो जायेगा | ४. मांस बढा गया है | ५. ब्रेन का ब्लॉकेज ६. न्क्सीर के अच्छी दावा है | ७. गर्मिओ में खून गिरता है| घी जितना पुराना हो उतना अच्छा है|
छाती कि बिमारी :- अस्थमा, श्वास,ब्रोकाइटिस अस्थमा १: आधा कप गोमूत्र सुबह खाली पेट ले २: दालचिनी पावडर शहद या गुड मिलाकार लें |
कब्जीयत, कोष्ठबद्धता, मलबद्धता, कॉस्टिपेशन, एसीडीटी:- १) एक चमच गुड के साथ आढावा कप कच्ची अजवाइन रॅट को सोने से पहले लें उपर से गर्म पानी पिये २) अनार का रस ३) अंगूर का रस ४) त्रिफळा ५) रात को पानी में१०-१२ किसमिस या ५-७ मुनक्का डालकर सुबह चंबा -चंबा कर खाये फार पानी पिये ६) अजावईन तवे पर गर्म करके काला नामक मिलाकार बॉटल में बंद कर के रखना और १५-२० दिन तक खाये | आवला ऍसिडिटी को कंटोल करता है दूध मी गाय का दूध मिलाकार पिये, त्रिफळा चूर्ण खाये |
कमर दर्द, घुटनो का दर्द , संधिवात, गढिया का इलाज:- सोट+हल्दी+मेथी दाना बराबर मात्रा में लेकर तीनो पिसकर पावडर बना ले, एक चमच पावडर सुबह- सुबह खाली पेट लें, उपर से हल्का गर्म पाणी पिये | हारसिंगार के ५ पत्ते पत्थर पर पिसकर एक गिलास पाणी में डालकर पाणी आधा होणे तक गर्म करे और थंडा होणे के बाद घुट मारकर पिये |
दस्त, डायरिया:- आधा चम्मच कच्चा जीरा चबाकर खायें फिर पानी पी लें एक ही खुराक में ठीक हो जायेगा। कच्चा दूध आधा कप एक नींबूनिचोड़ कर तुरंत पियें। (डायरिया/डिसेंट्री) दोनों ठीक करता है।
चिकनगुनिया-डेंगू-ब्रेन मलेरिया:- (1) हारसिंगार के 5 पत्ते पत्थर पर पीसकर एक गिलास पानी में पानी आधा होने तक गर्म करें और ठण्डा होने के बाद घूंट मार कर पियें तीन दिन से ज्यादाना पियें।
(2) तुलसी का काढ़ा, नीम की गिलोय, सोंठ, पिपर, थोड़ा गुड़ तीन खुराक में रोग ठीक हो जायेगा।
होमियोपैथी में - बर्बेरीस - वलगेरीस (मदर टिचर) दवा कि 10-१५ बुंद एक कप पाणी में डालकर दिन में ३-४ बार पी लें डेढ से डॉ महिने में पथारी निकल जायेगी | बाद में चायना -१००० (चायना १०००) लिक्विड फार्म में दो- दो बुंद सुबह,दोपहर, शाम एक बार लेन भविष्य में कभी पथारी नहीं होगी | पथारी वाले चुने का पानी भी नहीं लें सकते है|
अर्थराईटिस:- चुना और मेथी खाईये २०- ३० साल पुराना अर्थराईटस है, हरसिंगार का पौधा जिसे रातराणी भी कहते है संस्कृत मी पारिजात कहते हैं फूल रात में खिलते हैं सुगंध बहुत आती हैं फूल सफेद और दण्डी नारंगी होती हैं, पत्ते कांटे जैसे चुंभते हैं, 6-७ पत्ते पिसकर एक गिलास पाणी में आधा रहाणे तक खूब गर्म करना, रात को हि बनाकर रह ले सुबह - सुबह खाली पेट घुट मारकर पी लें १०-१२ दिन में आराम हो जायेगा,एक से डेढ महिने में ठीक हो जायेगा कभी -कभी 3 महिने भी लग जाते हैं दोबारा गर्म नहीं कारणा हमेशा ताजा ही बनाना|
पुराना जोड़ों का दर्द, घुटने-हिप जॉइन्ड निकलने की नौबत आये तो आप रिप्लेस मत कराये इस औषधि का प्रयोग करे|
सर्दी खासी ,जुकाम:- अदरक,सोंठ, हल्दी, चुना,किशमिश, दालचीनी, मेथीदाना, काली मिर्च, तुलसी का पत्ता, अनार गुड शहद काई औषधिया हमारे रसोई घर में हैं |
१) अदरक के रस को हल्का गर्म करके उसमे शहद मिलाकार सुबह, दोहपर, शाम पिये |
२) अदरक के रस और तुलसी को पिसकर हल्का गर्म करके उसमे शहद मिलाकार सुबह,दोपहर , शाम पिये | शहद को कभी गर्म ना करे, शहद को कभी किसी में मिलाकार भी गर्म नहीं करे, शहद के बदले देशी गुड चलेगा, गुड डाळकर गर्म कर सकते हैं |
३) कच्ची हल्दी और भी अच्छी है हल्दी को हमेशा दूध में गर्म करके हि लेन चाहिये ज्यादा प्रभाव करती है पाणी के साथ भी ले सकते हैं, हल्दी कि मात्रा हमेशा पाव चमच हि लें |
बच्चो की टॉन्सिल:- बहुत पुराना रोग है आधा चमच हल्दी का प्रयोग करना, जितना मूह खुले खोलकर चमच मूह के अंदर तर्क ले जाकार हल्दी गले में डाल देना फिर एक घंटे तक उसे कुछ मत देना है, लार के द्वारा हि हल्दी पेट में जाने दे | तीन दिन लिया तो टॉन्सिलाइटिस ठीक हो जायेगा |
थ्रॉट इन्फेक्शन - पाव चमच हल्दी,एक गिलास दूध,एक चमच गाय का घी खूब गर्म करके चुस्की लेकर पिये |
जुकाम : जुकाम में गेहू जितने बडे चुने का इस्तेमाल करें |
एलर्जी : बार -बार छिक आती है देशी गे का घी रॅट को एक बुंद नाक में डालकर सो जाये |
१. जिसे नींद नहीं आती असे अच्छी नींद आयेगी | २. खराटे बंद हो जायेंगे | ३. सायनस ठीक हो जायेगा | ४. मांस बढा गया है | ५. ब्रेन का ब्लॉकेज ६. न्क्सीर के अच्छी दावा है | ७. गर्मिओ में खून गिरता है| घी जितना पुराना हो उतना अच्छा है|
छाती कि बिमारी :- अस्थमा, श्वास,ब्रोकाइटिस अस्थमा १: आधा कप गोमूत्र सुबह खाली पेट ले २: दालचिनी पावडर शहद या गुड मिलाकार लें |
कब्जीयत, कोष्ठबद्धता, मलबद्धता, कॉस्टिपेशन, एसीडीटी:- १) एक चमच गुड के साथ आढावा कप कच्ची अजवाइन रॅट को सोने से पहले लें उपर से गर्म पानी पिये २) अनार का रस ३) अंगूर का रस ४) त्रिफळा ५) रात को पानी में१०-१२ किसमिस या ५-७ मुनक्का डालकर सुबह चंबा -चंबा कर खाये फार पानी पिये ६) अजावईन तवे पर गर्म करके काला नामक मिलाकार बॉटल में बंद कर के रखना और १५-२० दिन तक खाये | आवला ऍसिडिटी को कंटोल करता है दूध मी गाय का दूध मिलाकार पिये, त्रिफळा चूर्ण खाये |
कमर दर्द, घुटनो का दर्द , संधिवात, गढिया का इलाज:- सोट+हल्दी+मेथी दाना बराबर मात्रा में लेकर तीनो पिसकर पावडर बना ले, एक चमच पावडर सुबह- सुबह खाली पेट लें, उपर से हल्का गर्म पाणी पिये | हारसिंगार के ५ पत्ते पत्थर पर पिसकर एक गिलास पाणी में डालकर पाणी आधा होणे तक गर्म करे और थंडा होणे के बाद घुट मारकर पिये |
दस्त, डायरिया:- आधा चम्मच कच्चा जीरा चबाकर खायें फिर पानी पी लें एक ही खुराक में ठीक हो जायेगा। कच्चा दूध आधा कप एक नींबूनिचोड़ कर तुरंत पियें। (डायरिया/डिसेंट्री) दोनों ठीक करता है।
चिकनगुनिया-डेंगू-ब्रेन मलेरिया:- (1) हारसिंगार के 5 पत्ते पत्थर पर पीसकर एक गिलास पानी में पानी आधा होने तक गर्म करें और ठण्डा होने के बाद घूंट मार कर पियें तीन दिन से ज्यादाना पियें।
(2) तुलसी का काढ़ा, नीम की गिलोय, सोंठ, पिपर, थोड़ा गुड़ तीन खुराक में रोग ठीक हो जायेगा।
Comments
Post a Comment