स्वाइन फ्लू
यह एक विदेशी बीमारी है जो कि H-1N-1 वायरस के कारण होती है यह वायरस सुअर में जिंदा रहता है यह वायरस 27 डिग्री से अधिक तापमान पर जीवित नहीं रहता और भारत में तो 35 डिग्री से अधिक तापमान रहता है। यहpig वायरस है जो सुअर का मांस खाते हैं उन्हीं को होता है, भारत में यह बीमारी संभव नहीं है। अगर आपको भय लगता है तो बचाव के लिये निम्न उपाय हैं-
तुलसी और गुड़वेल का काढ़ा 2-3 बार, 2-3 दिन पियें। इसके अलावा होमियोपैथी में ARSENIC ALB-200 10-12/- रूपये की आती है, 1 बूँद सीधे जीभ पर हर आधे घण्टे के बाद 3 बार लेना है कोई साईड इफेक्ट नहीं है। पहले तो स्वाईन फ्लू आयेगा ही नहीं और यदि आयेगा तो 3 दिन में चला जायेगा। इसकी 40 से अधिक दवायें हैं।
हेपेटाईटिस A सामान्य रूप से वर्षा में गंदगी के कारण होता है। हेपेटाईटिस B हिन्दुस्तान में यह बीमारी होती ही नहीं है। फिर भी डॉक्टर द्वारा टीके लगाये जाते हैं। जितनी वेक्सीन लगती है उसका साईड-इफेक्ट बहुत खराब है। अमेरिका में AVN flu | के लिये 1816-1818 में वेक्सीन लगाया था। चार करोड़ पचास लाख लोग मरे थे जिन्होंने नहीं लगवाया। वे जीवित बचे।
ताकत के लिये अच्छा दिखने के लिये:- गोलियाँ खाते हैं इंजेक्शन लेते हैं, स्टीरॉईड दी जाती है, नपुंसक हो जायेंगे प्रतिरक्षा शक्ति खत्म हो जाती है। गन्ने के रस में, फलों के रस में, दही, छाछ, दाल में चूना डालकर खायें, केला खाइये चना-मूंगफली गुड़ के साथ खायें। खाने के बाद तिल चबाकर खायें ताकत आयेगी स्वास्थ अच्छा रहेगा।
कैप्स्यूल जिलेटिन से बनते हैं और जिलेटिन जानवरों की आँत से बनती है। जिम जाकर किसी का वजन आज तक कम नहीं हुआ है बल्कि छोड़ने पर वजन और बढ़ जाता है। दर्द की दवा लगातार खायेंगे तो किडनी-गुर्दे जरूर खराब होगें। पेरासीटामोल (दर्द और बुखार की दवा) ज्यादा खायेंगे तो ब्रेन हैमरेज, लीवर, किडनी खराब होगी। डॉयलिसिस में खून बदलना पड़ता हैं, ब्लड प्रेशर की गोली खाने पर । बार-बार पेशाब आयेगा, फिर आपको दुसरी बीमारी आ जायेगी। हार्टअटैक के समय जो दवा देते हैं वह खून को पतला कर देती है। एक्सीडेंट में मृत्यु इसलिये होती है कि उनका खून ज्यादा बहा क्योंकि दवा खाने से खून पतला हो गया। वरना प्रकृति ने ऐसी व्यवस्था की है खून गाढ़ा होकर स्वत: ही रुक जाता है।
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