रोग धीरे-धीरे शरीर में अपनी जड़े फैलता है |

तेरहवाँ सूत्र:-रोग धीरे-धीरे शरीर में अपनी जड़े फैलता है |

हमेशा शुद्ध तेल का उपयोग करें, शुद्ध तेल अर्थात जो कच्ची घनी का निकला हो |
शुद्ध तेल वैट, पित्त और कफ को शांत रखता है |

तेल का चिपचिपापन और गाढ़ापन उसका महत्वपूर्ण घातक फैट एसिड होता है | तेल की गंध तेल का पोषक तत्त्व होता है | तेल को रेसिनफ़ करने के लिए ६-७ केमिकल लगते है और डबल रिफाइंड करने के लिए १२-१३ केमिकल लगते है |मनुष्यों द्वारा बनाये सारे केमिकल जहर होते है, जिससे चिपचिपापन और गंध ख़त्म होते ही तेल का महत्वपूर्ण घटक फैट एसिड और पोषक तत्व ख़त्म हो जाते है | ये रिफाइंड तेल ही हमारे अधिकांश रोगो का मूल कारण है |

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