कुछ जरूरी जानकारी

भोजन हमेशा पूर्व दिशा या उत्तर दिशा कि तरफ मुह कारके खाये. दक्षिण दिशा के और कभी मुह कारके ना काहे, चाले लेकिन कभी खडे होकार कभी काम ना कारे | हमारा शरीर सोने के लिये सबसे अच्छा, फार बैठने के लिये | चालते समय दोनो पायरो पे बराबर का भार पादना चाहिये पहिले एडी फार टाळावा फिर पंजा राखे |

पीठ के बल सोना सबसे अच्छा - सर, पीठ, कूल्हे, जैंघा, पिण्डली, एड़ी जमीन पर लगनी चाहिये बाँस की चटाई, घास की चटाई पर सोना सबसे अच्छा। दोपहर के भोजन के बाद पहले दायें सोयें फिर बायें सोयें फिर सीधे सोयें, रात में पहले बायें सोयें फिर दायें सोयें, फिर सीधे सोयें। हमेशा जमीन पर सोना, जमीन पर बैठना, जमीन पर पढ़ना,जमीन पर खाना, जमीन पर मरना। डिलीवरी जमीन पर बैठाकर करेंया जमीन पर अर्ध लेटी अवस्था में पैदा हुआ बच्चा ज्यादा स्वस्थ होगा। कोई भी बीमारी शुरुआत में छोटी ही होती है बाद में विराट रुप ले लेती है वात,पित्त, कफ का अपना श्रुवात मी छोटी होती है बाद मे विराट रूप ले लेती है वात, पित्त , कुफ का आपण परिवार है ये अकेले कभी नहीं आते हैं अगर ध्यान नहीं दिया तो ये अपने साथ पूरा परिवार लेकर आते हैं। जानवरों के पास ना लैब है/ना हँस्पिटल है/ना ही इनके पास डॉक्टर हैफिर भी निरोगी हैं। धरती पर 1 प्रतिशत मनुष्य के पास ये सब हैफिर भी वह रोगी है, सप्ताह में एक बार उपवास करने से कई रोग दूर होते हैं। उपवास कैसे करें?

(1) पूरे दिन गुनगुना पानी पियें उपवास खाली पानी पर सबसे अच्छा है।

(2) केवल फल और कच्ची सब्जी खायें, पका हुआ कुछ नहीं खायें तकलीफ करेगा। वस्तु के पकते ही उपवास के जरुरत का फोलिक एसिड खत्म हो जाता है जो शरीर को अंदर से शुद्ध करने के लिये होता है। उपवास में नमक भी नहीं खा सकते, हमेशा मध्य मार्गी रहें। उपवास करने वालों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती हैबीमार कम पड़ते हैं।

जल की शुद्धि-वर्षा का जल वर्ष भर खराब नहीं होता हैपत्थर और चूने से टंकी बनाकर जल को पूरे वर्ष के लिये एकत्रित करें। वर्षा का जल सबसे अच्छा, वर्षा का जल अमृत है, फिर बहती नदी का पानी जो गलेशियर से निकलती हैं, फिर कुंओ का पानी अच्छा, फिर तालाब का पानी अच्छा, गर्मी में मिट्टी के मटके का पानी पियें, बारिश में ताँबे के बर्तन का पानी पियें और ठंड में सोने-चाँदी के बर्तन का पानी पियें। लोटे से पानी पीना चाहिये क्योंकि सरफेस टेंशन कम होता है। पानी का गुण है सफाई करना। अस्थमा, ब्रोंकाईटिस अस्थमा, साँस, कफ के लिये पानी गर्म करके पियें। प्लास्टिक बंद बोतल का पानी या अन्य चीज कभी नहीं पियें, प्लास्टिक बंद बोतल का पानी स्वास्थ्य के लिये अच्छा नहीं है। किसी भी प्रकार का कोल्डड़िकना पियें ये सभी विषैले हैं। डिब्बा बंद किसी भी प्रकार के फलों का रस या पेय नापियें ताजे फलों का रस, दूध, दही, छाछ, नींबू पानी, आँवले कारस, शरबत पियें।

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