श्री दत्तजयंतीका महत्त्व सारिणी १. श्री दत्तजयंती २. दत्तजयंतीका महत्त्व ३. जन्मोत्सव मनाना ४. दत्तजयंतीपर अनुभूति होना ५. दत्तयाग ६. भगवान दत्तात्रेयकी उपासनाके अंतर्गत कुछ नित्यके कृत्योंके विषयमें ईश्वरसे प्राप्त ज्ञान १. श्री दत्तजयंती दत्त मार्गशीर्ष पूर्णिमाके दिन मृग नक्षत्रपर सायंकाल भगवान दत्तात्रेयका जन्म हुआ, इसलिए इस दिन भगवान दत्तात्रेयका जन्मोत्सव सर्व दत्तक्षेत्रोंमें मनाया जाता है । २. दत्तजयंतीका महत्त्व दत्तजयंतीपर दत्ततत्त्व पृथ्वीपर सदाकी तुलनामें १००० गुना अधिक कार्यरत रहता है । इस दिन दत्तकी भक्तिभावसे नामजपादि उपासना करनेपर दत्ततत्त्व का अधिकाधिक लाभ मिलनेमें सहायता होती है । ३. जन्मोत्सव मनाना दत्तजयंती मनाने संबंधी शास्त्रोक्त विशिष्ट विधि नहीं पाई जाती । इस उत्सवसे सात दिन पूर्व गुरुचरित्रका पारायण करनेका विधान है । इसीको गुरुचरित्रसप्ताह कहते हैं । भजन, पूजन एवं विशेषतः कीर्तन इत्यादि भक्तिके प्रकार प्रचलित हैं । महाराष्ट्रमें उदुंबर (गूलर), नरसोबाकी वाडी, गाणगापुर इत्यादि दत्तक्षेत्रोंमें इस उत्सवका विशेष महत्त्व है । तमिलनाडुमें भी दत्तज...
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